Thursday, 2 September 2021

रुक जा 'मन' कुछ भी नहीं कर रहा ऊपरवाला ये सब तो नीचें वालों के ही, किए का असर है।

  • मैं तो समझा  कि  ये  रब का कहर है
  • मगर यार, तेरे मेरे लहज़े में ही ज़हर है।
    • सियासत वो कर रहें हैं, महलों में बैठे 
    • दिखता किसे, जल रहा  मेरा  शहर है।
  • उजड़ गई तू-तू  मैं-मैं में प्रेम की बगिया 
  • गैरों की झंझावत में टूटता, अपनो का घर है।
    • दुहाई दे देकर थक जाओगे, इन्सानियत की
    • अरे वो मर चुकी, अब तो बस दौलत अमर है।
  • रुक जा 'मन' कुछ भी नहीं कर रहा ऊपरवाला
  • ये सब तो नीचें वालों के ही, किए का असर है।
  1. I understood that this is the havoc of Rab Magar Yaar, Tere Mere Lahaze Mein Hi Zahar Hai.  
  2. Siasat are doing that, sitting in palaces  Looksa Kise, is my city burning.
  3. Udhar Gaye Tu-Tu Me-I Mein Prem Ki Bagiya breaks in the grating of the gars, is the house of Apno. 
  4. Will get tired of giving the duhai, said Insaniyat                                                                  Oh she dead, now just wealth is immortal.
  5. Ruk ja 'mind' doing nothing uppermanAll of these are the effects of those who have done it.  
रुक जा 'मन' कुछ भी नहीं कर रहा ऊपरवाला ये सब तो नीचें वालों के ही, किए का असर है।



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